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DIVYA KANOON, today's lawyers become tomorrow 's deities with spiritual ĺaws
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ANIL Grover
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Jul 30, 2026
शहर के बीचों-बीच खड़ा, एक अनोखा न्यायालय। जहाँ कानून से पहले सिखाया, आत्मा का था परिचय। काले कोट में आए सब, मन में था अभिमान। एक शब्द ने बदल दिया, सबका जीवन-ज्ञान। ॐ शांति... ॐ शांति... यही हमारी पहचान। हम आत्माएँ शांति स्वरूप, एक पिता, एक भगवान। ॐ शांति... ॐ शांति... यही है सच्चा अभिवादन। याद में जीना, प्रेम से मिलना, यही है दिव्य संविधान। Verse 2 पहले बाबा को भोग लगाओ, फिर प्रेम से भोजन पाओ। भूख नहीं, भाव स्वीकारें, दिल के दीप जलाओ। ट्रस्टी बनकर कर्म करो, हल्का हो हर भार। जो कुछ पाया, बाबा तेरा, यही है सच्चा उपहार। देह बदलती, आत्मा चलती, साथ चलें संस्कार। आज ही अपने दोष मिटाओ, बने देवता इस बार। लक्ष्मी-नारायण का राज्य, फिर से होगा तैयार। आज से अपने जीवन में, भर लो दिव्य विचार। ब्रह्मा तन का लिया सहारा, राजयोग पढ़ाने आए। प्रेम, शांति, सुख की गंगा, धरती पर फिर बहाए। तीर्थ नहीं बस पैरों से, मन को भी पावन करना। बिंदु रूप शिव को याद कर, अपने घर को लौटना। ॐ शांति... ॐ शांति... यही हमारी शान। स्वयं नियम का पालन करके, बनें स्वर्ग के कानूनधार। कर्म करें, फल से रहें परे, यही कर्मातीत उड़ान। ज्वालामुखी योग की शक्ति, बन जाए पहचान। एक पिता... एक परिवार... यही है स्वर्णिम संसार। ॐ शांति... ॐ शांति...
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