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ISHWAR SE KIYA ANUBANDH, Jeevan ki raho Mai chalt a Tha Mai,krodh ki Anandi Mai
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ANIL Grover
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Aug 5, 2026
जीवन की राहों में चलता था मैं, क्रोध की आँधी में जलता था मैं। ऑफिस हो या अपना घर-आँगन, हर दिन टूटता मेरा अनुबंध। बॉस की डाँट और अपमान मिला, दोष किसी का था, नाम मेरा लिखा। घर में बच्चों की छोटी तकरार, मन में उठता क्रोध अपार। रोकर मैंने बाबा से कहा, "कैसे निभाऊँ यह पावन वचन?" मुस्काकर बोले शिव बाबा फिर, "याद है तेरा दिव्य अनुबंध?" मैंने पाँच विकार तुम्हें सौंपे, फिर क्यों वापस ले आता हूँ? बाबा, अब ऐसी शक्ति दो, हर पल याद में रह पाऊँ। याद की चाबी, प्रेम का द्वार, खुल जाए बुद्धि का हर भंडार। राजयोग से जीवन सँवार, मिले स्वर्णिम युग का अधिकार। भारत मेरी जन्मभूमि नहीं, पर ईश्वर की कर्मभूमि है यही। यहीं पिता राजयोग सिखाते, राजाओं का ताज पहनाते। दुनिया देती केवल नौकरी, बाबा देते स्वर्ग की चौधरी। तन-मन-धन सब अर्पण कर दूँ, इक्कीस जन्मों का सुख भर लूँ। चौरासी जन्मों का चक्र पूरा, अब घर लौटने का है सवेरा। आत्मा बनकर बाबा को याद करूँ, हर पाप का बोझ हल्का करूँ। देह-अभिमान सबसे बड़ा चोर, छीन ले शांति हर एक ओर। आत्म-अभिमानी बन जाऊँ जब, माया हार जाए उसी पल सब। सहजयोग मेरी प्रकृति बने, हर विषय में मैं पूर्ण बनूँ। सहन करूँ मैं खुशी-खुशी, बाबा का सच्चा बच्चा बनूँ। अब न टूटे दिव्य अनुबंध, अब न लौटे पाँचों विकार। राजयोग की ज्योति जले, स्वर्णिम युग हो साकार। बाबा, तेरी याद की चाबी से, बुद्धि का ताला खुल गया। ईश्वर से जो अनुबंध किया, जीवन मेरा सफल हुआ।
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