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ANIL Grover
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Uploaded to LYKSTAGE
Aug 15, 2026
थके हुए कदम, झुका हुआ सिर, मन में चिंता, आँखों में डर। लक्ष्य बड़े, जिम्मेदारी भारी, जीवन बन गया जैसे बीमारी। सिर पर बोझ अहंकार का, मुट्ठी में सपना संसार का। हर कोई कहता – "मेरा, मेरा", इसी में खोया जीवन सारा। तभी एक साधारण मुसाफ़िर आया, सफेद वस्त्रों में प्रकाश समाया। मुस्कुराकर धीरे से उसने कहा, "बच्चे, ये बोझ किसने दिया?" 'मेरा' छोड़ो, 'तेरा' अपनाओ, शिव बाबा का हाथ थाम जाओ। एक सेकंड में पूर्ण विराम, मिट जाए हर चिंता तमाम। बेफिक्र बादशाह बन जाओ, प्रकाश का ताज पहन जाओ। शिव बाबा संग चलना सीखो, हर पल योग की शक्ति सीखो। पत्नी बोली, बच्चे पुकारें, कब घर आओ, कब हमें निहारें? CEO बोला, "समय सँभालो, जीवन में संतुलन भी पालो।" ऑफिस भी सेवा, घर भी सेवा, हर कर्म बने ईश्वर की सेवा। ट्रस्टी बनकर कर्म निभाओ, हर जिम्मेदारी बाबा को सौंप जाओ। क्यों? कैसे? कब? ये प्रश्न मिटाओ, पूर्ण विराम का अभ्यास अपनाओ। व्यर्थ विचारों को आज विदा दो, हर श्वास में बाबा को बसा लो। क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, इनसे ही होता जीवन लाचार। साथ रहे जब परमपिता का, जीवन बन जाए सदा उजियारा। 'मेरा' से 'तेरा' का यह सफ़र, बना दे जीवन सुंदर अमर। प्रेम भी हो, शक्ति भी साथ, यही है शिव बाबा की बात। बेफिक्र बादशाह बन जाएँ, दुनिया में शांति की किरण फैलाएँ। मन से सेवा, योग ज्वालामुखी, विश्व बने फिर स्वर्ग सुखी। सुप्रीम CEO ने मुस्कुराकर कहा— "मैं वेतन लेने नहीं आया, तुम्हारे सिर का बोझ उतारने आया हूँ।" ॐ शांति...
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