क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? जैसे मोदी ने आडवाणी को हटाया, क्या योगी भी...?
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patrakar
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Aug 24, 2026
क्या भाजपा के भीतर 'मोदी के बाद कौन?' (After Modi, Who?) की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग छिड़ चुकी है? इस वीडियो में हम गहराई से विश्लेषण करेंगे कि कैसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ही राजनीतिक गुरु पीएम नरेंद्र मोदी के 'प्लेबुक' का उपयोग करके पीआर, लोक-लुभावन योजनाओं और आक्रामक छवि के मामले में सबको पीछे छोड़ रहे हैं । वीडियो के मुख्य बिंदु: प्रचार का महामुकाबला: जहां केंद्र सरकार ने पिछले 11-12 वर्षों में पूरे देश में पब्लिसिटी पर लगभग ₹6,000 करोड़ खर्च किए हैं , वहीं योगी सरकार ने भी उत्तर प्रदेश में प्रचार-प्रसार पर पानी की तरह पैसा बहाया है , जिसमें 5,650 करोड़ रुपये से अधिक सीधे विज्ञापन और विजुअल पब्लिसिटी पर खर्च हुए हैं । मोदी का प्लेबुक और योगी का दांव: आर्थिक लक्ष्य: मोदी जी का $5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का सपना है , तो योगी जी ने यूपी को $1 ट्रिलियन की इकॉनमी बनाने का लक्ष्य रखा है । हालांकि, $307 बिलियन से शुरू होकर यूपी अभी केवल $400 बिलियन तक ही पहुंच पाया है । आक्रामक एक्शन: जहां पीएम मोदी "घर में घुसकर मारने" की बात करते हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ सीधे 'बुलडोजर मॉडल' से न्याय करते हैं । चुनावी रेवड़ी: चुनाव जीतने के लिए योगी सरकार ने भी महिलाओं के खातों में सीधे ₹3,000 ट्रांसफर करने का बड़ा ऐलान किया है । दिल्ली बनाम लखनऊ की गुप्त जंग: साल 2021 में कोविड-19 के संकट के दौरान दिल्ली की बड़ी बैठक से योगी जी को बाहर रखना , पीएम मोदी के करीबी ए.के. शर्मा को डेप्युटी सीएम न बनने देने का योगी का फैसला , और आरएसएस (RSS) के दत्तात्रेय होसाबले से मुलाकात टालने के लिए योगी का अचानक सोनभद्र दौरे पर निकल जाना । क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?: न्यूट्रल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आज वही खेल खेल रहे हैं जो कभी नरेंद्र मोदी ने 2009-2014 के बीच लालकृष्ण आडवाणी और दिल्ली की पुरानी लीडरशिप के साथ खेला था । क्या योगी आदित्यनाथ आने वाले समय में अपने ही गुरु को राजनीतिक मात दे देंगे? आपकी इस पर क्या राय है? नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं!
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