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FROM EXCUSES TO BECOMING A MASTER:MAAN MEIN SHANTI DIL MEIN SHAKTI JEEVAN MEIN

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ANIL Grover  verified-tag

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Sep 1, 2026

“बहाने छोड़, मास्टर बन” मन में शांति, दिल में शक्ति, जीवन में नई उमंग जगाएँ। बहानों की दुनिया छोड़कर, अपने जीवन के मालिक बन जाएँ। आज कहानी है अर्जुन की, एक प्यारे से बच्चे की, जिसके सपने थे बहुत बड़े, लेकिन आदत थी बहाने बनाने की। कभी कहता—समय नहीं था, कभी कहता—मैं सो गया था, कभी कहता—मैं तैयार नहीं था, कभी कहता—मौका ही नहीं मिला था। छोटी-सी बात भी बड़ी लगती, हर कठिनाई पहाड़ बन जाती, जिम्मेदारी सामने आती तो, एक नई वजह निकल आती। लेकिन एक दिन जीवन में, आया एक दिव्य संदेश, एक शिक्षक ने प्यार से पूछा— “कब तक चलेगा यह बहानों का देश?” बहाने छोड़, आगे बढ़, अपने मन का मालिक बन। हार नहीं, समाधान चुन, अपने जीवन का मास्टर बन। बच्चा बनकर प्यार सीख, मालिक बनकर कर्म कर। शक्ति तेरे अंदर है, अपने ऊपर विश्वास कर। बहाने छोड़, आगे बढ़, हर दिन खुद को बेहतर कर। शांति को अपना साथी बना, हर दिल की तू सेवा कर। अर्जुन के पास बहाने थे, एक नहीं, शायद सौ थे। कभी मौसम जिम्मेदार था, कभी हालात मजबूर थे। कभी समय कम पड़ जाता, कभी मन तैयार नहीं होता। कभी कहता—कल कर लूँगा, आज क्यों कुछ करना होता? धीरे-धीरे उसे समझ आया, बहाना बाहर नहीं रहता, बहाना मन के अंदर होता है, और मन ही रास्ता बनाता है। यदि मन कहे—मैं नहीं कर सकता, तो शक्ति वहीं रुक जाती है। यदि मन कहे—मैं कोशिश करूँगा, तो राह स्वयं खुल जाती है। उसने पहली बार देखा, उसके शब्द ही उसकी दीवार थे। उसके डर ही उसकी जंजीर थे, और उसके विचार ही हथियार थे। तभी बाबा ने प्यार से कहा, “बेटा, समस्या से मत डरना। समस्या आई है सिखाने को, उससे भागकर मत गुजरना।” “समय की कमी मत कहो, समय का सदुपयोग सीखो। दूसरों को दोष मत दो, अपने भीतर झाँकना सीखो।” “तुम्हारे जीवन की दिशा, तुम्हारे हाथों में है। तुम्हारी शक्ति बाहर नहीं, तुम्हारे विचारों में है।” अर्जुन चुप होकर सुनता रहा, दिल में कुछ बदलने लगा। जिस मन में सौ बहाने थे, वहीं एक नया दीप जलने लगा। उसने पूछा—“बाबा, मैं क्या करूँ?” बाबा ने मुस्कुराकर कहा— “हर दिन अपने आप से पूछो, आज मैंने क्या अच्छा किया?” “आज कहाँ मैं कमजोर पड़ा? कल

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