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KARM VIKARM AND AKRAM:EK SHAANT GHAR KI PAAVAN DHARTI PAHADO KAY BEECH SHANTI

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ANIL Grover  verified-tag

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Sep 17, 2026

एक शांत गाँव की पावन धरती, पहाड़ियों के बीच बसा था गाँव, हरियाली थी, शांति थी, जीवन में था सरल-सा भाव। उस गाँव में एक धनवान पिता था, पर धन से बढ़कर विनम्रता थी, उसके जीवन की सच्ची संपत्ति, उसकी निर्मल मानवता थी। दो बेटे थे उसके प्यारे, दोनों को देता था ज्ञान, कहता था — सुनो मेरे बच्चों, कर्म ही बनाते हैं इंसान। धन आएगा, धन जाएगा, यौवन भी एक दिन ढल जाएगा, नाम और यश भी मिट जाएगा, पर कर्म साथ रह जाएगा। कर्म ही भाग्य बनाते हैं, कर्म ही राह दिखाते हैं, शुद्ध कर्म उठाते ऊपर, गलत कर्म नीचे ले जाते हैं। हे मनुष्य, तू याद रख, हर कदम सोचकर रखना, आज जो बीज तू बोएगा, कल वही फल तुझे चखना। [मुखड़ा] कर्म, विकर्म और अकर्म, जीवन का गहरा संदेश, सत्य का दीप जलाओ मन में, मिट जाए अज्ञान का क्लेश। कर्म करो तुम प्रेम से, कर्म करो विश्वास से, सत्य, दया और नम्रता से, चलो सदा प्रकाश के पास। जो बीज आज बोओगे, वही कल बन जाएगा भाग्य, कर्म तुम्हारे हाथ में हैं, कर्मों से बनता जीवन-मार्ग। [अंतरा 1 — पिता की शिक्षा] पिता ने दोनों बेटों को, एक दिन पास बुलाया, बड़े प्रेम से जीवन का, एक सत्य उन्हें समझाया। बोले — बेटों ध्यान से सुनना, जीवन खेल नहीं है, हर कर्म की अपनी छाया है, कुछ भी व्यर्थ नहीं है। शुद्ध कर्म आत्मा को उठाते, गलत कर्म बंधन बनते, सत्य की राह पर जो चलते, वे भीतर से निर्मल रहते। धन यदि हो तो विनम्र रहना, शक्ति मिले तो दया करना, ज्ञान मिले तो बाँटते जाना, कभी किसी का दिल न दुखाना। अपने कर्मों की जिम्मेदारी, स्वयं हमेशा लेना, गलती हो तो सत्य स्वीकारना, झूठ का सहारा मत लेना। पिता बोले — याद रखो, कर्म ही भाग्य बनाते हैं, मन के भीतर जैसे बीज, वैसे फल उगाते हैं। [मुखड़ा] कर्म, विकर्म और अकर्म, तीन राहें जीवन की, सत्य चुनो या मोह चुनो, दिशा बनेगी मन की। कर्म करो शुभ भाव से, मन में रखो उजियारा, आज का हर एक निर्णय, बन सकता है कल तुम्हारा। [अंतरा 2 — दोनों भाइयों की राह] दो भाई थे एक ही घर के, लेकिन सोच अलग थी, एक के भीतर सत्य का दीपक, दूजे पर मोह की छाया थी। छोटा बेटा कर्म था नाम, नाम ही जैसे उसका संदेश, ईमानदारी उसकी पहचान, सत्य उसका विशेष परिवेश। छोटी-सी गलती भी होती, पिता के सामने कह देता, अपने दोषों को छिपाने के बजाय, सच्चाई से उन्हें सह लेता। उसके मन में

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