मस्त मगन मन का मयूरा पूछ रहा है किधर है तू । Monsoon Song ।
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Sandeep Gauttam
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Sep 20, 2026
Song of the Mind in Monsoon [Verse 1] दादूर बोले, बोले पपीहा कोयल गाये कुहू कुहू कू मस्त-मगन मन का मयूरा पूछ रहा किधर है तू। [Verse 2] बदरा छाए कारे-कारे पल-पल उनको नैन निहारे झम-झम गिरती बारिश बोले भीग लो आओ साथ हमारे नटखट पगली पुरवाई पूछे किसकी राह तके है तू [Chorus] मस्त-मगन मन का मयूरा पूछ रहा किधर है तू। [Verse 3] कल कल बहती नदियां इठलाएं बलखाएं झर झर गिरते निर्मल निर्झर पल पल पास बुलाएं चहक रहीं फ़ज़ाएं पूछे क्यूँ इतना गुमसुम है तू [Chorus] मस्त मगन मन का मयूरा पूछ रहा किधर है तू। [Verse 4] शाखों पर पत्ते झूल रहे फूलों पर भौंरे गूंज रहे जंगल-उपवन सारे देखो कैसे मिलकर झूम रहे कह रही चुलबुली बुलबुल किसकी याद में खोया है तू [Outro] मस्त मगन मन का मयूरा पूछ रहा किधर है तू।
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