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KAMAL SA IS SANSAR MAI: MAI EK SHANT AATMA HOO PARKASH KA CHOTA SITARA HOO
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ANIL Grover
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Sep 23, 2026
ॐ शान्ति… मैं एक शांत आत्मा हूँ, प्रकाश का छोटा-सा सितारा हूँ, दुनिया की हलचल में रहते हुए भी, अपने भीतर उजियारा हूँ। भागना नहीं है दुनिया से, छिपना नहीं है कहीं, बाबा की याद साथ हो जब, तो डर की कोई बात नहीं। [मुखड़ा] जल में रहकर कमल समान, न्यारा और पावन रहना है, दुनिया अपनी गति से चले, हमें शांत ही रहना है। सागर में जैसे नाव रहे, पर पानी अंदर न आए, कर्म करें हम योगी बनकर, मन में तूफान न आए। याद करो… जुड़ो… पवित्र रहो, हर पल ऊँचे कर्म करो। कर्मयोगी शांत आत्मा बन, बाबा से अपना मन जोड़ो। [अन्तरा 1] सुबह हुई, फिर काम वही हैं, फोन, समस्या, जिम्मेदारी, दफ्तर में है समय का दबाव, घर में भी है तैयारी। पहले हर चिंता मन में भरती, हर बात मुझे दुखाती थी, आज बाबा को याद किया तो, अंदर शक्ति आती थी। [अन्तरा 2] देखा मैंने जल में कमल को, कीचड़ फिर भी पास रहा, फूल रहा निर्मल और सुंदर, उस पर कोई दाग न रहा। मैंने मन से पूछा फिर, “क्या मैं ऐसा बन सकता हूँ?” दुनिया में रहकर भी बाबा, न्यारा-प्यारा रह सकता हूँ? [मुखड़ा] जल में रहकर कमल समान, न्यारा और पावन रहना है, दुनिया अपनी गति से चले, हमें शांत ही रहना है। [अन्तरा 3] कोई मुझ पर क्रोध करे तो, क्रोध से उत्तर क्यों दूँ मैं? पहले बाबा को याद करूँ, फिर अपना कर्तव्य करूँ मैं। समस्या से भागूँ नहीं मैं, समस्या को हल करना है, बस अपनी चेतना बदलकर, शांत भाव में चलना है। [सेतु] समस्या बाहर होती है, समाधान भीतर आता है, शांत मन जब बाबा से जुड़ता, सही मार्ग दिखलाता है। मैं केवल कर्मचारी नहीं, मैं आत्मा हूँ, कलाकार, विश्व-नाटक के इस मंच पर, करना है अपना श्रेष्ठ व्यवहार। [अन्तरा 4 – चिंता से शुभ भावना] जब कोई अपना दुखी हो जाए, चिंता मन में आती है, लेकिन बाबा याद दिलाते, चिंता शक्ति घटाती है। बाबा से शक्ति लेकर फिर, उस आत्मा को शुभकामना दूँ, शांति की किरणें भेजकर, उसके जीवन में आशा भर दूँ। चिंता बदले शुभ भावना में, भय बदले विश्वास में, योग बना रहे बाबा से, शक्ति आए हर श्वास में। [अन्तरा 5 – रात की चेकिंग] जब दिनभर की दौड़ रुके और, रात शांति लेकर आए, बाबा के संग बैठूँ चुपचाप, मन अपना सच बतलाए। आज कहाँ मेरा मन भटका? कहाँ हुई कोई प्रतिक्रिया? कहाँ शांति को खोया मैंने? कहाँ चाहिए थी सजगता? गलती
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