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FIKR SAY FAKHR KI AUR:KITNI CHINTAYA MAAN MAY THI KAL KYA HOGA AAJ KYA HAI GHAR

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ANIL Grover  verified-tag

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Sep 28, 2026

कितनी चिंताएँ मन में थीं, कल क्या होगा, आज क्या है, घर की चिंता, परिवार की चिंता, भविष्य की चिंता साथ है। हाथ अपने कर्म में लगे थे, पर मन थकता जा रहा था, चेहरा मुस्काता था बाहर से, अंदर कुछ बोझ बढ़ता जा रहा था। तभी एक मीठी आवाज़ आई— “बच्चे, जो तुम्हारा है ही नहीं, उसे अपने सिर पर क्यों उठाते हो?” मैं ठहर गया... और याद आया— मैं आत्मा हूँ। मैं अकेला नहीं हूँ। परमात्मा मेरा रक्षक है। जो कुछ उनका है, वह उन्हीं को सौंप सकता हूँ। और उसी एक स्मृति में फ़िक्र बदलने लगी... फ़ख़्र में। [मुखड़ा] फ़िक्र से फ़ख़्र की ओर, चिंता से प्रकाश की ओर, डर के अंधेरे से निकलकर चलें बाबा की याद की ओर। मन मेरा हल्का हो जाए, दिल मेरा निर्मल हो जाए, बाबा जब याद तुम्हें करता हूँ, मुझे अपना स्वरूप याद आए। फ़िक्र से फ़ख़्र की ओर, “मेरा” से “तेरा” हो जाए, जिम्मेदारी कर्म में रहे, मन बाबा में खो जाए। मैं बेफ़िक्र बादशाह बनूँ, अहंकार से नहीं, विश्वास से, दुनिया मेरी नहीं बाबा, मैं चलता हूँ तेरे प्रकाश से। [अंतरा 1 — चिंता का बोझ] घर की चिंता, काम की चिंता, परिवार और भविष्य की चिंता, सफलता का डर, असफलता का डर, मन में कितनी गहरी चिंता। सोचा कल क्या होगा, सोचा आज क्यों ऐसा है, हर समस्या को पकड़े रखा, मन का बोझ वैसा ही रहा है। चिंता ने समस्या हल न की, बस शक्ति मेरी कम होती गई, एक छोटी-सी बात को पकड़े, मन की ऊर्जा बहती गई। बाबा ने पूछा— “बच्चे, तुम्हारी प्राकृतिक स्थिति क्या है?” चिंता की रेखाएँ चुनोगे, या माथे का दिव्य प्रकाश? [मुखड़ा] फ़िक्र से फ़ख़्र की ओर... [अंतरा 2 — मेरा से तेरा] मैं कहता था—मेरा परिवार, मेरी समस्या, मेरा दर्द, मेरी योजना, मेरा भविष्य, मेरी चिंता, मेरा कर्म। “मेरा” कहते-कहते बाबा, मन और भारी होता गया, जिसे अपना समझकर पकड़ा, वही डर बनकर आता गया। तभी मीठा ज्ञान मिला— बस एक शब्द बदलना है। “मेरा” छोड़कर “तेरा” कहना, और मन को हल्का करना है। “बाबा, यह सब तेरा है, मैं केवल ट्रस्टी हूँ।” कर्तव्य मैं पूरा करता हूँ, पर चिंता का मालिक नहीं हूँ। एक अक्षर का अंतर बाबा, लेकिन अंतर बहुत महान, “मेरा” बनाता बंधन भारी, “तेरा” देता मुक्त उड़ान। [मुखड़ा] मेरा से तेरा हो जाए, बंधन सब दूर हो जाए, फ़िक्र से फ़ख़्र की ओर चलें, मन में शान्ति भर जाए। [अंतरा 3 — पानी का गिलास]

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