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KHANDHARO KAY PAAR NAYA GHAR:MERA SACHA GHRANDRO KAY PAAR NAYA MAAN KAY GHAR

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ANIL Grover  verified-tag

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Oct 17, 2026

Writing मुखड़ा — मेरा सच्चा घर खंडहरों के पार नया घर, मन के पार नया सफर, पुरानी दुनिया छूट रही है, खुल रहा है सुख का द्वार। शिव बाबा की मीठी याद में, जगमग हो मेरा संसार, मन में शांति, नयनों में ज्योति, बाबा तुमसे है प्यार। ओ मेरे मीठे बाबा, ओ मेरे प्यारे बाबा, तेरी याद में मिलता है, आत्मा को सच्चा सहारा। खंडहरों के पार नया घर, मन के पार नया सफर, तेरी याद में चलना सीखूँ, बन जाऊँ मैं फरिश्ता सुंदर। अंतरा 1 — पुराना घर, पुरानी यादें एक पुराना घर था मेरा, दीवारों में दरारें थीं, छत से पानी टपक रहा था, फिर भी यादें प्यारी थीं। आँगन में बचपन की बातें, कमरों में बीते दिन थे, हँसी कभी, आँसू कभी थे, अपनेपन के कितने क्षण थे। मैं सोचूँ कैसे छोड़ूँ, यह घर तो मेरा संसार, इन दीवारों में बसी हुई है, जीवन की हर याद अपार। तभी समय ने धीरे बोला, सुन ले मन की बात, जो भी आया, एक दिन जाएगा, यही है जीवन की सौगात। मुखड़ा दोहराएँ खंडहरों के पार नया घर, मन के पार नया सफर, पुरानी दुनिया छूट रही है, खुल रहा है सुख का द्वार। अंतरा 2 — नए घर का संदेश एक दिन ऐसा पत्र मिला, नई सुबह का संदेश, सुंदर घर तैयार खड़ा था, खुशियों से भरा परिवेश। आँखों में आशा जागी, हृदय में थोड़ी घबराहट, नया घर सामने था मेरे, फिर भी पुरानी चाहत। तभी अंतर्मन ने पूछा, क्यों बँधा है मन आज? जब नया सवेरा सामने है, क्यों बीते कल का राज? बाबा की शिक्षा याद आई, मोह नहीं, कर्तव्य निभाओ, घर-परिवार के बीच रहकर, मन को ऊँचा उठाओ। वस्तु रहे या वस्तु चली जाए, शांति न मन से जाए, सच्चा सुख उस आत्मा को, जो बाबा को याद लगाए। अंतरा 3 — निर्मला बहन की शिक्षा मिली मुझे निर्मला बहन, चेहरे पर मुस्कान, उनकी वाणी में शीतलता, हृदय में दिव्य ज्ञान। मैंने पूछा, प्यारी बहन, कैसे छोड़ूँ मोह? अपनों से प्रेम भी करना है, कैसे मिटे मन का द्रोह? बहन ने मुझको समझाया, सुन मीरा, यह ज्ञान, दुनिया छोड़ना नहीं है, बदलना है अभिमान। कर्तव्य निभाओ प्रेम से, सबका रखो सम्मान, बुद्धि को आसक्ति से मुक्त करो, यही है सच्चा ज्ञान। जैसे कमल जल में रहकर, जल से न्यारा रहता है, वैसे कर्म करो संसार में, मन बाबा में रहता है। त्याग नहीं जिम्मेदारी का, त्याग करो अभिमान, मोह मिटाकर प्रेम बढ़ाना, यही है ऊँची शान। अंतरा 4 — रसोई में योग सुबह

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